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बुधवार, 27 फ़रवरी 2008

यमुना के हालात से पानी को मोहताज

एक समय था जब यमुना को दिल्ली की जीवनदायिनी नदी कहा जाता थाअब हालात यह है की उसी जीवनदायिनी नदी में जीवन की संभावनाए समाप्त होती जा रही हैशहर की गंदगी ने इसे नाले में तब्दील कर दिया हैरही सही कसर कॉमनवेल्थ खेल की तैयारिया पुरी कर देगी उत्तर भारत की इस नदी की कुल लम्बाई १३९० किलोमीटर है,तथा यह हरियाणा ,उत्तर प्रदेश और दिल्ली राज्यों होकर गुजराती है एक माँ अपने बचो पर अपना सब कुछ न्योछावर कर देती हैस्वयं भूखी रह कर उनका पालन -पोषण करती हैवैसे ही यमुना ने भी आगरा,मथुरा और दिल्ली नगर को अपने तट पर बसाया और उसकी प्यास बुझा रही हैयमुना को सुन्दरता शीतलता दी और बदले में दिल्ली ने यमुना को क्यादिया ?विकास के नाम पर बहाई जाने वाले गंदगी ,कूडा-कचरा ,जल-जीवो को मोत यह बड़ी ही शर्म की बात है की बात है की अपने राष्टीय-गान में हम जिन नदियों का गुनगान करते है उन्हें ही हम अवरुद्ध कर और जहेरीला बना कर दिन-प्रतिदिन नष्ट करते जा रहे है ,और इसमें कोई संदेह नही की इसके शिकार हम ख़ुद हो रहे है एक समय था वर्ष १९५० में की लंदों की टेम्स के भाग को मृत से था लेकिन वहा की सरकार के सफल प्रयासों के की लंदन१९६० में जीवित कर दिया और आज टेम्स लंदन के दिल की तरह काम कर रही है ठीक उसी प्रकार आज यमुना का २२ किलोमीटर का भाग गंदगी की भारी मार झेल रहा हैयह नदी मल - मूत्र व कचरे का भंडार ही नही बन गई बल्कि उसमें जो साफ जल होता था ,वह भी प्रदूषित हो गया है किसी भी जल में जीवन की संभावना के लिए उसमें घुली आकसीजन की मात्रा ५ मिलीग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए ,और यमुना में यह मात्रा शुन्य आंकी गई है यह सभी के लिए खतरनाक है आज हालत यह है की जीवन के लिए जरुरी साफ जल की आब कमी पड़ गई है यानि की ,दिली की प्यास बुझाने के लिए पानी भी माँगा जा रहा है