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बुधवार, 7 मार्च 2012

मेरा जहाँ मेरा अस्तित्व

सूरज की तपती किरणे हूँ तो क्या,
छांव का मेरा आंचल आज भी है|

गगन में छायी बदिरा हूँ तो क्या,
नदियों की मेरी कल कलाहट आज भी है|

पंछी बन गगन में उडती हूँ तो क्या ,
जमीं पर मेरा नामोनिशां आज भी है|

बन्धनों में सभी जकड़ी हूँ तो क्या,
ख्वाहिशो का मेरा जन्हा आज भी है|

आज में फलक पर हूँ तो क्या,
जमीं पर मेरा आशियाँ आज भी है|

समुंद्र पर फैली रेत हूँ तो क्या ,
मोती सी आब मुझ में आज भी है |

यादों को मेरी जहाँ से मिटा दोगे तो क्या,
जहन में बंसा मेरा रूप आज भी है|
(एक माँ ,बेटी और बहू )

पंछी बन गगन में उडती हूँ तो क्या,
ज़मी पर मेरा नामोनिशां आज भी है|