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शुक्रवार, 26 सितंबर 2008

asli laxmi का स्वागत क्यो नही?

स्त्री को हम पूजते है और अपनी धरती को हमने सुजला सुफलाम करने वाली नदियों को ,हमने गंगा,जमुना,के नाम दिए हैसंकट आने पर हमें याद आती है आक्रामक और शत्रु का विनाश करने वाली दुर्गा माँ ! पर आश्चर्ये की बात यह है की जिस देश में स्त्री की पूजा होती है उसी देश में स्त्री की अवहेलना भी होती है आखिर वक्तव्य और कृति में इतना विरोधाभास क्यो?और आब तो हमरी हिम्मत यहाँ तक बढ गई है की माँ के गर्भ में लड़की होगी तो गर्भ को ख़त्म करा दिया जाता हैक्योकि इसके पीछे कुछ विश्वास है की १.लड़का कुल का दीपक है २.लड़का यानि बुडापे की लाठी और लड़की यानि दहेज़ के खर्च का बोझ ३। यदि हम यह सवाल करे की आप के मन को अच्छे से कोन समझता है लड़की या लड़का ?तो १००%जवाब मिलता है मेरी राय के अनुसार सबसे अधिक दोषी वो लोग है जिन्होंने इसे एक व्यवसाय बना लिया हैगर्भ्लिंग परीक्षण या सोनोग्राफी के दुवारा गर्भका लिंग पहचाना जा सकता है यह बात समाज में किस ने फैलाई ?और इस समाज की कमजोरी का ख़ुद के लिए इस्तेमाल किस ने किया डॉक्टर लोगो ने न ?एक डॉक्टर जो समाज का हितचिन्तक माना जाता है उसी ने ग़लत रस्ते पर जाने वाले लोगो को रोकने की जगहे ,वही उन ग़लत रास्ता दिखाने लगा एक घातक सामाजिक प्रक्रिया को पैसे के लालच से badawa देने लगा इससे अधिक durbhagye purn क्या है यह काम तभी रुक सकता है १.जब सरकार इस के लिए sakth kanoon बनाये २.सामाजिक vichardhara बदले ३.लोगो में jagrukta को badaya जाए ४.और docter लोगो का लालच कम हो यही ५ tatvo से मिलकर यह dushchark बना है जिसे todna jaruri है