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बुधवार, 10 मार्च 2010


जिंदगी से जब मेंने यह प्रश्न किया

ऐ जिंदगी यह तुने क्या किया

जिंदगी की राह पर मुझे यू अकेला छोड़ दिया

जिंदगी ने हर बार यही उत्तर दिया

जो दिया वो क्या कम दिया

जिंदगी के हर कदम पर तेरे हर एक कर्म पर

तुझे जीवन का सबब दिया

वो क्या कम किया

फिर भी पूछता है मुझसे मेंने तुझे क्या दिया

सुख़ की छाव हो या गमो की घटा हो

हर दम तेरे साथ जिया हर घूंट तेरे साथ पिया

सुख़ कम गम खूब दिया

तो क्या किया

जिंदगी के हर एक पहलू से तुझे अवगत किया

वो क्या कम किया

फिर भी पूछता है मुझसे मेंने तुझे क्या दिया

जिंदगी में पाना जिंदगी में खोना

हर पल एक नयी साँस से नया जीवन जीना

तुझे सब सिखा दिया

वो क्या कम किया

फिर भी बार बार मुझसे यही प्रश्न किया

तुने जीवन में मुझे क्या दिया ,

मेंने फिर भी तुझे यही उत्तर दिया

जो दिया वो क्या कम दिया

इस छोटी सी जिंदगी मैं

तेरे पुरे जीवन का सार तुझे समझा दिया

वो क्या कम किया फिर भी पूछता है मुझसे

ऐ जिंदगी ये तुने क्या किया

5 टिप्‍पणियां:

  1. wha wha waha .... kya baat hi

    dil ka poora dard udel diyaa hi ..jise..

    buth achee likah hi balki bole to vastvikta hi lagti hi...

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  2. वाह जी क्या बात है , बेहद उम्दा कविता लगी ।

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  3. जिंदगी ने हर बार यही उत्तर दिया
    जो दिया वो क्या कम दिया
    अति सुंदर "जीवन का सार" अगर समझ आ जाये तो प्रश्न ही नहीं होगा - बहुत सुंदर रचना

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  4. bahut sundar rachna...
    zindgi or aadmi ke sawal jawab ka bhut marmik chitran...bahut khub...

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  5. bilkul sahi likha hai , i m agree with this, ham isi jindagi se to sikhte hai sab kuch.......... very nice poem

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