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शनिवार, 30 मई 2009

मुझ में भी है जीवन



बीज से पैदा हुआ हू


जड़ो से हु जुडा


जुड़कर जड़ो से एक तने ने


मुझको किया खड़ा ,


तने की कुछ शाखाओ से

मुझको यह सुंदर रूप मिला

उन पर लिपटे सुंदर

पत्तो से हु मैं जड़ा ,


धुप मैं छाव मैं देता तुमको

भूख मैं देता फल

मुझको प्रेम करो तुम सब

मैं तुम को देता जीवन


तुम से मैं हु मुझ से तुम हो

यह है सत्य वचन

मुझे अब न काटना तुम

आखिर मुझ मैं भी है जीवन

2 टिप्‍पणियां:

  1. प्रयावरण चेतना जगाती रचना पसंद आई.

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  2. aap ke dwara likhi yeh kavita mujhe bahut hi acchi lagi.

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