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बुधवार, 8 अप्रैल 2009

मैं और मेरे पिताजी

  • जब मैं ५ साल का था (इससे पहेले की बातें मुझे याद नही ),तब सोचता था -मेरे पिताजी दुनिया के सबसे स्मार्ट और सबसे ताकतवर इंसान है
  • १० साल की उम्र मैं मेंने महसूस किया की मेरे पिताजी हर चीज का ज्ञान रखने वाले और बेहद समझदार भी है
  • जब मैं १५ का हुआ तो महसूस करने लगा की मेरे दोस्तों के पापा तो मेरे पिताजी से भी ज्यादा समझदार है
  • २० साल की उम्र मैं मैंने पाया की मेरे पिताजी को दुनिया के साथ चलने के लिए कुछ और ज्ञान की जरुरत है
  • २५ साल की उम्र मैं मेरी यह सोच बनी की मेरे पिताजी किसी और दुनिया के है और वह नए ज़माने के साथ नही चल सकते
  • ३० साल का हुआ तो महसूस किया की मुझे किसी भी काम के बारे मैं उनसे सलाह नही लेनी चाहिए क्योकि उन्हें हर काम मैं नुक्स निकालने की आदत सी पड़ गई है
  • ३५ साल की उम्र मैं मैंने महसूस किया की आब पिताजी को मेरे तरीके से चलने की समझ आ चुकी है ,इस लिए छोटी- मोटी बातो पर उन की सलाह ली जा सकती है
  • जब मैं ४० साल का हुआ तो महसूस किया की कुछ जरुरी mamlo मैं पिताजी की salaha लेना जरुरी है
  • ५० साल की उम्र मैं मुझे लगा की पिताजी की सलाह के बिना कुछ नही करना चाहिए ,और १५ साल की उम्र के बाद की मेरी धर्नाये ग़लत थीअब मेरे बच्चे बड़े हो चुके थे परन्तु अफ़सोस ,इससे पहेले की mein apne is faisle par amal kar pata, mere पिताजी इस संसार को अलविदा कहे गए और मैं उनकी हर सलाह व तजुर्बे से वंचित रहे गया
  • बेटा समझता है ,बाप बनने के बाद !
  • बेटी समझती है, माँ बनने के बाद !
  • बहु समझती है ,सास बनने के बाद !

यह सब मैंने एक समाचार पत्र मैं पढ़ा और चाह कि आप के साथ शेयर करू और unka bhi shukriya करू जिस ने इतना अच्छा लेख लिखा

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